जरूरत से ज्यादा सोचने से उम्र कम हो जाती है

हाल ही में हुई एक रिसर्च के मुताबिक हावर्ड मेडिकल स्कूल के अध्यान कर्ताओं ने 70% उम्र में मरने वालों के दिमाग की तुलना उन लोगों से कि जिनकी उम्र कम से कम 100 साल के करीब थी इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों की उम्र से पहले मृत्यु हुई उनमें रेस्ट नाम के प्रोटीन की कमी थी यह प्रोटीन दिमाग को शांत रखने ज्यादा सोचने और चिंता करने से रोकता है रेस्ट प्रोटीन  अल्ज़ाइमर्ज़  की बीमारी से भी बचाता है एक अति सक्रिय दिमाग का जीवनकाल काफी कम पाया गया है जबकि इस तरह की अधिकता को नियंत्रित कर लिया जाए तो उम्र लंबी हो सकती है ऐसा नेचर नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए एक अध्ययन में पाया गया ज्यादा सोचना शायद आपको हानिकारक ना लगता हो लेकिन इससे स्वास्थ्य समस्या रोग और विकास जुड़े होते हैं  अगर आप अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा सोचते हैं तो आपको ये बीमारियां होने की ज़्यादा संभावना है

गंजापन

ज़्यादा सोचना, चिंता करना और तनाव का सीधा असर गंजेपन और एलोपेसिया नाम की हार्मोनल प्रॉब्लम से है।अगर आप ज़रूरत से ज़्यादा सोचेंगे तो आपके बाल तेज़ी से गिरने शुरू हो जाएंगे।

दिल की बीमारी

ज़्यादा सोचने से आपक दिल की बीमारी का भी शिकार हो सकते हैं। अगर आप ज़्यादा सोचते हैं तो आपको सीने में दर्द, चक्कर आना आदि जैसे लक्षण आमतौर पर दिखते होंगे।

मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों

कई मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे और उनसे होने वाले जोखिम, सबका का सीधा रिश्ता ज़्यादा सोचने से ही है। ज़्यादा सोचना और घबराहट होने का भी सीधा रिश्ता इसी से है। डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी भी ज़्यादा सोचने की वजह से होती है। शराब या ड्रग्स का ज़्यादा सेवन, सोने में परेशानी या फिर नींद न आने की बामीर, सभी लगातार चिंता करने की वजह से होते हैं।