हार्ड वर्कर नहीं बने स्मार्ट वर्कर …

आपने गौर किया होगा कि आपकी तरक्की की राह में कोई और बाजी तो नहीं मार रहा। अगर नहीं तो क्या आप अपने लक्ष्य तक उतनी तेज़ गति से पहुंच पा रही हैं? कुछ ऐसे ही सवाल मन में घर कर लेते हैं, जब आप वांछित मंजि़ल हासिल नहीं कर पातीं। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही है तो जानें कुछ टिप्स, जो आपको अपनी क्षमता पहचानने और लक्ष्य की ओर बढऩे में ज़रूर मदद करेंगे।

बस या कैब की वजह से रोज़ाना देर से ऑफिस आ रही हैं, डेडलाइन पर काम पूरा नहीं कर रही हैं या मीटिंग्स में अपडेट नहीं हैं तो इन बातों को आपका मैनेजमेंट ज़रूर नोट कर रहा होगा। जो कर्मचारी समय पर ऑफिस नहीं आते, उनकी वजह से टीम की प्रोडक्टिविटी प्रभावित होती है।

अगर आप ऑफिस से ज़्यादा छुट्टियां ले रही हैं तो ज़ाहिर है इससे आपका काम भी प्रभावित हो रहा होगा और आपकी वजह से बाकी टीम पर भी प्रभाव पड़ता होगा इसलिए बहुत जरूरी होने पर ही छुट्टी लेने की कोशिश करें।

अगर आप अंतिम समय तक काम को टाल कर रख रही हैं और आपके पास नए आइडियाज़ की कमी है तो इसका असर टीम की प्रोडक्टिविटी पर पड़ेगा। उदाहरण के लिए यदि आपके बॉस शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म लक्ष्य, समय सीमा के साथ तय नहीं करते तो वह कलीग्स को दिशा-निर्देश कैसे दे पाएंगे?

अगर आप बातूनी हैं या आपको अपने पहले वर्क कल्चर के बारे में बताना है तो जो सुनने में इंट्रेस्ट ले, उसे ही बताएं। बार-बार पुरानी कंपनी या संस्थान की तारीफ करना ठीक बात नहीं। ऑफिस आवर्स में सिर्फ प्रोफेशनल बातचीत करें। इन सब बातों से टीम के उत्साह में कमी, अहंकार और पावर का लालच बढ़ता है। इस तरह की प्रवृत्ति एम्प्लॉइज़ को एक-दूसरे के साथ के बजाय एक-दूसरे के खिलाफ काम करने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।

Archana Tiwari